संसद का नया सत्र
पाया महात्मा गांधी का पत्र
पूछते हैं
मेरे बेटे कैसे हैं
सब मेरी तरह हैं
या कुछ गोडसे जैसे हैं
संसद ने दिया जवाब
महात्मा जी
आप होते तो
हो जाते लाजवाब
आकड़ों में
यह देश
विकास कर रहा है
और आम आदमी
आज भी
आप ही की तरह
उपवास कर रहा है
और जहां तक
गोडसेवाद का सवाल है
इस देश का
एक बड़ा तबका
उसे कबूल चुका है
आपका तपोस्थल भी
आपको भूल चुका है
महात्मा जी
शायद आपको
जानकारी न हो
आपकी जन्मभूमि में
एक अरसे से
एक नया मजहब
चल रहा है
जिसमें क्रूरता हंसती है
आदमी जल रहा है
महात्मा जी
किससे कहें
कैसे कहें
सोचकर
शर्म के मारे
मरे जा रहे हैं
इस देश के सांसद
कबूतरबाजी में
धरे जा रहे हैं
महात्मा जी
किससे कहें
अब सेना के जवान भी
ट्रेन के डिब्बों में
मनमानी करते हैं
आतंक से लड़ने वाले
ईनामी पुलिस अफसर
महिलाओं से
छेड़खानी करते हैं
महात्मा जी
हमारा कृषिमंत्री
चीनी व दूध का मूल्य
बढ़ने की सूचना
खुशखबरी
के रूप में देता है
हमारा प्रधानमंत्री
सरकारी विज्ञापन में
पाक सेना अधिकारी का
फोटो छपने को
गंभीरता से नहीं लेता है
और मीडिया के लोग
हमारी सदाशयता को
विफलता के रूप में
परोसते हैं
हमको ही कोसते हैं
जबकि यह देश
रोज नई उपलब्धि
गढ़ रहा है
जूता उछलने
के मामले में
अमेरिका के बराबर
चल रहा है
महात्मा जी
यहां की स्थिति
को लेकर
आप नाहक उदास हैं
इस तरह की
सैकड़ों उपलब्िधयां
हमारे पास हैं
आपको चाहिए तो
हम गोपनीय
तरीके से भेज देंगे
हमारा विश्वास करिए
इस देश में
हमारे नेतृत्व में
लोकतंत्र
फल रहा है
फूल रहा है
और खिल रहा है
नेहरू वंश की कृपा से
उसे चार गांधियों का
नेतृत्व मिल रहा है।
Saturday, January 30, 2010
गांधी का पत्र
Posted by
धीरेंद्र श्रीवास्तव
at
6:38 PM
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Labels: महात्मा गांधी
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