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Saturday, January 30, 2010

गांधी का पत्र

संसद का नया सत्र

पाया महात्‍मा गांधी का पत्र

पूछते हैं

मेरे बेटे कैसे हैं

सब मेरी तरह हैं

या कुछ गोडसे जैसे हैं

संसद ने दिया जवाब

महात्‍मा जी

आप होते तो

हो जाते लाजवाब

आकड़ों में

यह देश

विकास कर रहा है

और आम आदमी

आज भी

आप ही की तरह

उपवास कर रहा है

और जहां तक

गोडसेवाद का सवाल है

इस देश का

एक बड़ा तबका

उसे कबूल चुका है

आपका तपोस्‍थल भी

आपको भूल चुका है

महात्‍मा जी

शायद आपको

जानकारी न हो

आपकी जन्‍मभूमि में

एक अरसे से

एक नया मजहब

चल रहा है

जिसमें क्रूरता हंसती है

आदमी जल रहा है

महात्‍मा जी

किससे कहें

कैसे कहें

सोचकर

शर्म के मारे

मरे जा रहे हैं

इस देश के सांसद

कबूतरबाजी में

धरे जा रहे हैं

महात्‍मा जी

किससे कहें

अब सेना के जवान भी

ट्रेन के डिब्‍बों में

मनमानी करते हैं

आतंक से लड़ने वाले

ईनामी पुलिस अफसर

महिलाओं से

छेड़खानी करते हैं

महात्‍मा जी

हमारा कृषिमंत्री

चीनी व दूध का मूल्‍य

बढ़ने की सूचना

खुशखबरी

के रूप में देता है

हमारा प्रधानमंत्री

सरकारी विज्ञापन में

पाक सेना अधिकारी का

फोटो छपने को

गंभीरता से नहीं लेता है

और मीडिया के लोग

हमारी सदाशयता को

विफलता के रूप में

परोसते हैं

हमको ही कोसते हैं

जबकि यह देश

रोज नई उपलब्‍धि

गढ़ रहा है

जूता उछलने

के मामले में

अमेरिका के बराबर

चल रहा है

महात्‍मा जी

यहां की स्‍थिति

को लेकर

आप नाहक उदास हैं

इस तरह की

सैकड़ों उपलब्‍िधयां

हमारे पास हैं

आपको चाहिए तो

हम गोपनीय

तरीके से भेज देंगे

हमारा विश्‍वास करिए

इस देश में

हमारे नेतृत्‍व में

लोकतंत्र

फल रहा है

फूल रहा है

और खिल रहा है

नेहरू वंश की कृपा से

उसे चार गांधियों का

नेतृत्‍व मिल रहा है।