Thursday, October 15, 2009

मुठभेड़

मेरे गांव में
सड़क है
स्‍कूल है
अस्‍पताल है
पंचायत भवन
कई किता है
पर सब कुछ
कागज में छिपा है
इसे देखने को
आवश्‍यक है
आदमी
पढ़ा लिखा हो
उसका जमीर
बिका हो
मेरे गांव का
लेखपाल हो या
बीडीओ
एसडीएम हो
या डीएम
सभी इस निर्माण को
देख चुके हैं
इसकी अच्‍छाइयों
की रिपोर्ट
शासन को
भेज चुके हैं
इन रिपोर्टों के
आधार पर
मेरे गांव का
प्रधान
राज्‍य सरकार से
पुरस्‍कार पा चुका है
राष्‍ट़पति पदक के लिए
उसका नाम
दिल्‍ली जा चुका है
मेरे गांव का प्रधान
आश्‍वस्‍त है
कि उसका
कागजी फूल
दिल्‍ली में भी
खिलेगा
यह पुरस्‍कार
उसे ही मिलेगा
इस बीच
मेरे गांव में
एक ऐसा
पंचायतकर्मी आ गया
जो फाइल के
निर्माणों को़
जमीन पर ढूढ़ने लगा
प्रधान की धोखाधड़ी पर
कूढ़ने लगा
बात
लेखपाल से होते हुए
एसडीएम तक गयी
उन्‍होंने
पंचायतकर्मी को
बुलाया
और कहा
प्रधान से
मिलजुलकर रहो
फाइल में हुए
निर्माणों को
सही कहो
पंचायतकर्मी
हांफते हुए
फाइलों में हुए
निर्माण की कथा
डीएम को सुनाया
एसडीएम के
कथन को दोहराया
और शासन का
असली चेहरा
चरितार्थ हो गया
डीएम की कलम से
पंचायतकर्मी
बर्खास्‍त हो गया
लेकिन हिम्‍मत नहीं हारा
उसने फाइल में हुए
निर्माणों की
कथा
विधायकों को बतलाया
कुछ करने के लिए
उकसाया
सच जानकर
विधानसभा
गरम हो गई
स्थिति संभालने को
मुख्‍यमंत्री जी आए
पहले मुस्‍कराए
और फिर
न सांप मरे
न टूटे लाठी
की कहावत को
चरितार्थ कर दिया
मेरे गांव से
पंचायतकर्मी का
पद ही
समाप्‍त कर दिया
पंचायतकर्मी
फिर भी
हिम्‍मत नहीं हारा
इस मामले में
कुछ करने के लिए
दिल्‍ली में बैठी
सरकार को ललकारा
जवाब मिला
पाकिस्‍तान को
आतंकियों के खिलाफ
कार्रवाई करनी होगी
पंचायतकर्मी ने कहा
सर
बिना बात सुने
आया दूसरा उत्‍तर
अरुणाचल
भारत का
अभिन्‍न अंग है
पंचायतकर्मी
चीख पड़ा
सर, हमारी समस्‍या
पाक और चीन नहीं
फिलहाल
आपके वे लोग हैं
जो फाइलों में
निर्माण का अलख
जगा रहे हैं
जो मेरी रोटी के साथ
इस देश को
खा रहे हैं
जवाब में
इस बार
केवल फायरिंग की
आवाज सुनी गई
और सुबह
अखबारों में
खबर छपी
आंतरिक सुरक्षा
भेद रहा
एक आतंकी
बीती रात
समर्पण के लिए
ललकारा गया
जवाबी मुठभेड़ में
मारा गया।

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