आवश्यकता है
कुछ चरित्रहीनों की
जो चरित्रहीन ओलम्पिक में
भारत को
गोल्ड मेडल
दिलवा सकें
देश का गौरव
बढ़ा सकें
का अखबारों में
विज्ञापन
पढ़कर
मैंने
गांव के
प्रधान से कहा
आप अगर
किस्मत आजमाएंगे
गोल्ड मेडल
जरूर पाएंगे
प्रधान जी रोने लगे
बोले
हम इस मामले में भी
बड़े अभागे हैं
विधायक जी
हमसे सौ कदम
आगे हैं
और सांसद का
क्या पूछना है
वो तो वैसे ही
विधायक का
पांच गुना है
मंत्री
कुछ और
ज्यादा होगा
उसके ऊपर
बोफोर्स का
दादा होगा
मगर
ये तमाम लोग
मिलकर भी
चरित्रहीन ओलम्पिक में
जाएंगे
तो गोल्ड मेडल
नहीं पाएंगे
क्योंकि
ओलम्पिक
कोई दंगा नहीं है
कि जब चाहा
करा दिया
ओलम्पिक खेल है
और खेल के लिए
कड़ी मेहनत
जरूरी है
मैं जानता हूं
इस देश में
कड़ी मेहनत
केवल अधिकारी
कर सकता है
ये अधिकारी
अगर चरित्रहीन
ओलम्पिक में जाएंगे
गोल्ड मेडल
जरूर पाएंगे
लेकिन
एक शर्त है
चरित्रहीन ओलम्पिक में
कोई व्यापारी
नहीं शामिल हो
नहीं तो
इन अधिकारियों का
ईमान डिग जाएगा
गोल्ड मेडल
चंद डालरों में
बिक जाएगा
प्रधान जी रोने लगे
बोले
कवि जी
इस मामले में भी
हम लोगों को
केवल पछताना है
गोल्ड मेडल
नहीं पाना है
मैंने कहा
पा सकते हो
और पाना है तो
चरित्रहीन ओलम्पिक में
चरित्रवान भेजो
बंटवारे से पहले का
हिन्दुस्तान भेजो
मेरा दावा है
तू फिर
दुनिया में
छा जाएगा
गोल्ड मेडल
पा जाएगा।
Thursday, October 22, 2009
चरित्रहीन ओलम्पिक
Posted by
धीरेंद्र श्रीवास्तव
at
7:27 PM
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